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तिलकुट की खुशबू से महक रहा बाजार   

सहरसा : मकर संक्रांति का पर्व हो और तिलकूट नहीं मिले तो पर्व का आनंद बेकार है… और यदि तिलकूट गया का मिले तो क्या बात है. वैसे तो गया के तिलकूट का स्वाद लेने के लिए आपको वहां जाना पड़ेगा या फिर वहां से मंगाना पड़ेगा… लेकिन बीते कुछ वर्षों से  स्थानीय व्यवसायियों के द्वारा गया जिले के कारीगरों को बुलाकर शहर के लोगों को तिलकूट बनाकर उपलब्ध कराया जाने लगा है.

बीते पन्द्रह दिनों से  शहर के मुख्य बाजार शंकर चौक, चांदनी चौक सहित कई अन्य जगहों पर तिलकूट की दुकानें सज गयी है. कारीगरों के द्वारा जब गुड़ व तिल को मिलाकर धीमी आँच पर पकाया जाता है तो उसकी सौंधी खुशबुओं से पूरा माहौल महक उठता है. बाजार में तिल से बने विभिन्न प्रकार के तिलकूट एक सौ चालीस से लेकर चार सौ रुपए किलो की दर से उपलब्ध है मकर संक्रांति पर्व में तिल का काफी महत्व है. इस दिन हिन्दू धर्म मानने वाले लोग सूर्य देवता को तिल का प्रसाद चढ़ाकर उसे ग्रहण करते हैं और घर के बड़े सभी छोटे सदस्यों को तिल बहवा… .. कह कर प्रसाद देते हैं.

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